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आतंकियों की मदद करना पाकिस्तान को पड़ सकता है भारी, टेरर फंडिंग के लिए ब्लैक लिस्ट होने का खतरा

  • आतंकियों की मदद कर मुसीबत में आया पाकिस्तान
  • एफएटीएफ कर सकता है बड़ी कार्रवाई
  • पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जताई चिंता

इस्लामाबाद। आतंकियों की मदद करना और उन्हें पनाह देना पाकिस्तान के लिए बेहद महंगा सौदा साबित होने वाला है। टेरर फंडिंग के लिए एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है। भारत द्वारा इस मामले में की गई कोशिशों का असर अब दिखने लगा है। इसको लेकर पाकिस्तान भी सतर्क हो गया है। पाकिस्तान का कहना है कि इस मामले में की गई लॉबिंग के कारण वह बड़ी मुसीबत में पड़ने वाला है।

टेरर फंडिंग के लिए ब्लैक लिस्ट होने का खतरा

सोमवार को पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। कुरैशी ने कहा कि यह सब भारत द्वारा की गई लॉबिंग का नतीजा है। शाह महमूद कुरैशी ने लाहौर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान एफएटीएफ निगरानी की ग्रे सूची में रहता है तो देश को सालाना 10 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, “भारत द्वारा की गई लॉबिंग के कारण वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।” आपको बता दें कि पिछले साल जून में पेरिस स्थित एफएटीएफ ने पाकिस्तान को उन देशों की ग्रे सूची में रखा था, जिनके घरेलू कानूनों को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण की चुनौतियों से निपटने के लिए कमजोर माना जाता है। इसके अलावा पाक पर आतंकियों की वित्तीय मदद करने का आरोप लगाया गया है।

मुश्किल में पाक

विदेश मंत्री कुरैशी ने लाहौर के गवर्नर हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “विदेश कार्यालय वार्षिक नुकसान की गणना कर रहा है, क्योंकि पाकिस्तान को एफएटीएफ द्वारा काली सूची में डाल दिया गया है।” एफएटीएफ ने पाकिस्तान से देश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के संचालन पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। एफएटीएफ टीम जल्द ही पाकिस्तान का दौरा करने वाली है। दौरे से पहले पाकिस्तान ने एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्शल बिलिंग्सल को भारत के स्थान पर एशिया-प्रशांत के संयुक्त समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में अन्य देश को नियुक्त करने के लिए संदेश भेजा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एफएटीएफ की समीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण हो। आपको बता दें कि एफएटीएफ की टीम हाल ही में पाकिस्तान का दौरा करेगी। इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या इस्लामाबाद ने वित्तीय अपराधों के खिलाफ वैश्विक मानकों पर पर्याप्त प्रगति की है या नहीं। इससे पहले मार्च के अंतिम सप्ताह में एफएटीएफ टीम ने इस्लामाबाद में अपनी तीन दिवसीय यात्रा की थी। उसके बाद एफएटीएफ ने उल्लेख किया था कि पाकिस्तान ने आतंक की लड़ाई में बड़ी घोषणा जरूर की है लेकिन इस्लामिक स्टेट समूह, अल-कायदा, जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इंसानियत, लश्कर-ए-तैयबा द्वारा उत्पन्न खतरों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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