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बार काउंसिल ने पांचों अधिवक्ताओं को डिबार करने के आदेश पर लगाई रोक

फर्रूखाबाद। बार काउंसिल उत्तर प्रदेश ने जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महासचिव सहित पांचों अधिवक्ताओं को 10 वर्षो के लिये डिबार किये जाने के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश की जानकारी मिलते ही विरोधियों की खुशी काफूर हो गई। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, महासचिव संजीव पारिया, चुनाव अनुशासन समिति के सदस्य शिवप्रताप सिंह एडवोकेट, डा0 अनुपम दुबे एडवोकेट, दीपक द्विवेदी एडवोकेट ने सामूहिक रूप से 27 व 28 फरवरी को बार काउंसिल उत्तर प्रदेश की अनुशासन समिति के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर स्वंय के विरूद्ध पारित किये गये निर्णय का विरोध किया और उस निर्णय को निरस्त करने की मांग की।

अनुशासन समिति ने दोनों प्रार्थना पत्रों को स्वीकार कर लिया। अनुशासन समिति के सदस्यों ने प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के बाद पूर्व में पारित किये गये आदेश पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई के लिये 30 मार्च की तिथि तय की गई। इस आदेश की जानकारी मिलते ही श्री पारिया समर्थक अधिवक्ताओं में खुशी की लहर दौड गई। जब कि विरोधी खेमे में मायूसी छा गई। राज्य विधिज्ञ परिषद उत्तर प्रदेश के सचिव रामचन्द्र मिश्रा ने 2 मार्च को जारी किये गये पत्र में पारिया गुट के अधिवक्ताओं के साथ ही विरोधी गुट के अधिवक्ता राजीव बाजपेयी एडवोकेट को परिवाद संख्या 159/18 में पारित आदेश 28 फरवरी 2019 की प्रति अवलोकनाथ एवं अनुपालन के लिये भेजी है।

मालुम हो कि राजीव बाजपेयी एडवोकेट ने नियम विरूद्ध बार एसोसिएशन का चुनाव कराने के लिये बार काउंसिल में परिवाद कायम कराया था। इस मामले की सुनवाई के बाद बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने विपक्षीय जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्राम सिंह यादव, सचिव संजीव पारिया, शिवप्रताप सिंह एडवोकेट, डा0 अनुपम दुबे एडवोकेट एवं दीपक द्विवेदी एडवोकेट को व्यवसायिक कदाचरण को दोषी माना और इसी आधार पर उक्त अधिवक्ताओं को किसी भी न्यायालय सक्षम न्यायालय प्राधिकरण न्यायाधिकरण के समक्ष अधिवक्ता के रूप में उपस्थित होने हेतु 10 वर्षो के लिये प्रतिबंधित कर दिया था।

इस आदेश की प्रति जिलाधिकारी एवं जिला जज को भेजकर सम्बंधित पक्षों को तामील कराकर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा था। राजीव बाजपेयी एडवोकेट ने बार काउंसिल से 19 सितम्बर 2018 को बार एसोसिएशन के अवैधानिक ढंग से होने वाले चुनाव को रोकने तथा अध्यक्ष सचिव व उनके सहयोगियों के विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी। बार काउंसिल की विशेष समिति ने मामले की गम्भीरता को देखते हुये 7 सितम्बर 2018 को एक आदेश चुनाव के सम्बंध में पारित किया जिसमे अध्यक्ष सचिव से 6 बिन्दुओं पर आख्या मांगी गई।

जिसमे एल्डर्स कमेटी एवं चुनाव अधिकारी के द्वारा माडल बाइलाज फार बार एसोसिएशन यूपी की व्यवस्था के अनुसार ही चुनाव सम्बंधित समस्त कार्य निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से कराये जाने को कहा गया। आदेश का अनुपालन न होने पर विशेष समिति ने पुनः 16 सितम्बर 2018 को एल्डर्स कमेटी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया सर्वोच्चय न्यायालय एवं माडल बाइलाज द्वारा जारी नियमों व निर्देशों द्वारा चुनाव कराये जाने का निर्देश दिया गया। लेकिन 19 सितम्बर 2018 को नियमों का उल्लंघन कर चुनाव करवाया गया।

जिसमे विश्राम सिंह यादव अध्यक्ष व संजीव पारिया निर्वाचित घोषित किये गये। राजीव कुमार बाजपेयी ने पुनः 22 सितम्बर को प्रार्थना पत्र देकर चुनाव प्रक्रिया का अनुपालन न करते हुये अवैध तरीके से कराये गये चुनाव का रद्द करने एवं चुने गये अध्यक्ष सचिव तथा चुनाव समिति के विरूद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई करने की मांग की गई। इस सम्बंध में विशेष समिति ने 5 नवम्बर को आवश्यक निर्देश जारी किये। नवनिर्वाचित बार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं निर्वाचन समिति ने कोई स्पष्ट जबाब नही दिया। बल्कि गोलमोल स्पष्टीकरण दाखिल करके विशेष समिति को भ्रमित करने का प्रयास किया।

विशेष समिति ने 6 दिसम्बर के आदेश द्वारा अनुशासन समिति को मामले के निस्तारण हेतु प्रेषित किया। जिसकी सुनवाई के लिये कई तिथि नियति की गई लेकिन कोई भी विपक्षी उपस्थित नही हुआ और न ही अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान माडल बाइलाज के नियम व वैधानिक व्यवस्था के विरूद्ध कार्य करने हेतु विपक्षीगणों को अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार का दोषी माना गया। चुनाव प्रक्रिया में भाग न लेने के कारण पूर्व अध्यक्ष विपनेश सक्सेना का इस प्रकरण से कोई वास्ता नही पाया गया। उनके विरूद्ध धारा 35 अधिवक्ता अधिनियम की कार्रवाई निरस्त की गई।

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