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इनकी बनाई तकनीक दिमाग की गड़बड़ी बता देगी

देवलीना सरकार अमरीकी नागरिक हैं और कोलकाता की रहने वाली हैं। हाल ही आपने अमरीका के प्रतिष्ठित कॉलेज मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर जॉइन किया है। इन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद झारखंड के धनबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स यूनिवर्सिटी (आइएसएमयू) से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में बी.टेक किया था। हाल ही एमआइटी में इन्होंने रिसर्च लैब शुरू की है जिसमें नैनो इलेक्ट्रॉनिक और बायोलॉजी पर काम शुरू किया है। अब ये मनुष्यों के दिमाग के उस तथ्य को समझने में लगी हैं कि कैसे एक स्वस्थ दिमाग अलजाइमर, पार्किंसन और दिमाग से जुड़ी दूसरी बीमारियों से अलग होता है।

इसका पता करने के लिए ये और इनकी टीम नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स कंप्यूटिंग एप्लीकेशन तैयार करने में लगी है जिससे बायोलॉजिकल डिवाइस तैयार करने में मदद मिलेगी। इस तकनीक की मदद से ये पता किया जा सकेगा कि हमारे शरीर में कुछ गड़बड़ी होने वाली है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। खास बात ये है कि इस तकनीक की मदद से उस गड़बड़ी की पूरी जानकारी विस्तार से मिल सकती है। ये कहती हैं कि दिमाग की किसी एक कोशिका में खराबी होने पर डॉक्टर मिमी. या सेमी. के दायरे में ही उसके आसपास पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया में भी दिमाग की दूसरी कोशिकाओं को नुकसान होता है। इनका लक्ष्य एक ऐसी तकनीक बनाना है जिसकी मदद से उस खराब कोशिका का पता आसानी से चल सके और दूसरी किसी भी कोशिका को नुकसान न हो। इस तकनीक के आने से दिमांग से जुड़ी कई बीमारियों की समस्या हल होगी। बीमारियों से जुड़ी जांचों को सस्ता करना इनका लक्ष्य है। 2011 में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स से इलेक्ट्रिक्ल व कंप्यूटर इंजीनियरिंग से फेलोशिप मिली थी। 2015 में मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने राइजिंग स्टार अवॉर्ड दिया था।

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