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सर्वे / देश में अंग्रेजी अभी भी शहरी और अमीरों की भाषा, हिंदी के बाद दूसरे नंबर पर

  • लोक फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का सर्वे
  • गांव के 3% और शहर के 12% लोगों ने माना कि वे अंग्रेजी बोल सकते हैं
  • अंग्रेजी बोलने वालों 15%  से अधिक लोग क्रिश्चियन, 6%  हिंदू और 4%  मुस्लिम

लाइफस्टाइल डेस्क. भारत में सबसे ज्यादा अंग्रेजी कौन बोलता है और ऐसे वक्ता कहां रहते हैं? इसका जवाब जानने के लिए लोक फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने मिलकर सर्वे किया है। जिसकी जांच सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनमी ने की है। सर्वे के मुताबिक, भारत में अंग्रेजी बोलने वाला वर्ग धनी और शिक्षित है साथ ही ज्यादातर अगड़ी जाति का है। भूगोलीय स्थिति के आधार पर जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अंग्रेजी बोलने वालों का आंकड़ा कम हो सकता है। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी ही है।

जाति, धर्म, क्षेत्र और जेंडर के आधार पर भी जारी हुए आंकड़े

  1. सर्वे के मुताबिक, अंग्रेजी बोलने वालों का सम्बंध धर्म और जाति से भी है। अंग्रेजी बोलने वालों में 15 फीसदी से अधिक लोग क्रिश्चियन, 6 फीसदी हिंदू और 4 फीसदी मुस्लिम हैं। अगड़ी जाति के लोग दूसरी जातियों के मुकाबले तीन गुना अधिक अंग्रेजी बोलते हैं। इनमें पुरुषों की संख्या ज्यादा है। बुजुर्गों के मुकाबले कम उम्र के लोग अंग्रेजी का अधिक इस्तेमाल करते हैं।
  2. हिंदी के बाद देश में सबसे ज्यादा अंग्रेजी बोली जाती है। हिंदी भाषा में 50 से अधिक बोलियां जैसे भोजपुरी भी शामिल हैं। जिसे 5 करोड़ लोग बोलते हैं। 52.8 करोड़ भारतीयों के लिए पहली और दूसरी भाषा हिंदी है।
  3. सर्वे के अनुसार, 6 फीसदी लोगों ने कहा कि वे अंग्रेजी बोल सकते हैं। सामने आए नतीजे कहते हैं, अंग्रेजी अभी भी शहरी भाषा मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मात्र 3 फीसदी लोग बोले कि वे अंग्रेजी बोल सकते हैं वहीं शहरी क्षेत्र में ये आंकड़ा 12 फीसदी है।
  4. 41 फीसदी अमीर वर्ग के लोग ही अंग्रेजी बोलते हैं वहीं गरीब तबके का मात्र 2 फीसदी ही ऐसा कर पाता है। अंग्रेजी बोलने वालों में ज्यादातर शिक्षित वर्ग है और ये ऐसे लोग हैं जो ग्रेजुएट हैं।
  5. अंग्रेजी अलग-अलग भाषाई क्षेत्र के लोगों को संवाद स्थापित करने के लिए पुल की तरह काम करती है। दक्षिण के मुकाबले दक्षिण-पूर्व के राज्यों में अंग्रेजी अधिक बोली जाती है। दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों के धनी और गोवा-मेघालय के क्रिश्चियन लोग इस भाषा का अधिक इस्तेमाल करते हैं।
  6. असम सबसे बड़ा अपवाद है, यहां कम आय और सीमित क्रिश्चियन लोगों की संख्या होने के बाद भी अंग्रेजी का अधिक प्रयोग किया जाता है। देश में दो भाषा बोलने वाले 37.5 फीसदी और तीन भाषा वाले 11 फीसदी लोग हैं। हिंदी के साथ दूसरी भाषा बोलने वालों में मराठी और गुजराती शामिल हैं।
  7. जनगणना 2011 के मुताबिक, 2 लाख 56 लोगों की पहली, 8.3 करोड़ लोगों की दूसरी और 4.6 करोड़ भारतीयों की तीसरी भाषा भी अंग्रेजी है। यहां दूसरी भाषा से मतलब ऐसे लोगों से है जो अन्य भाषा भी जानते हैं, लेकिन प्रमुखता से अंग्रेजी या हिंदी का प्रयोग करते हैं।

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