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दावा / मोदी को हटाने के लिए कांग्रेस ने पाक से मदद मांगी, इमरान से बयान दिलवाने की साजिश रची: रक्षा मंत्री

  • पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि चुनाव में मोदी का जीतना जरूरी
  • इस बयान के बाद से ही विपक्षी दलों ने पाक को मोदी का समर्थक बताना शुरू कर दिया
  • रक्षा मंत्री ने बालाकोट हमले से लेकर राष्ट्रपति को पूर्व सैनिकों के पत्र पर भी बयान दिए

नई दिल्ली. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में कहा था कि कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए भारत में मोदी की भाजपा का चुनाव जीतना जरूरी है। अब उनकी इस बात का जवाब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा कि ऐसे बयान चुनाव के दौरान आते रहते हैं। कांग्रेस के कई नेता मोदी को हटाने के लिए पाक से मदद मांगने पहुंचे हैं। मुझे लगता है कि इमरान से बयान दिलवाना भी कांग्रेस की ही योजना का हिस्सा है।

सीतारमण ने पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस बयान को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत 16-20 अप्रैल के बीच हमला कर सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘मैं नहीं जानती कि उन्हें यह तारीखें कहां से मिलीं, इसलिए उन्हें शुभकामनाएं। पता नहीं यह क्या था, लेकिन सुनने में यह काफी दिलचस्प और काल्पनिक किस्म का लगा।’’

राजनीतिक बयानबाजी में सीमा की समझ जरूरी
राजनीति में महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल किए जाने के सवाल पर सीतारमण ने कहा, “मेरा मानना है कि विचारधारा पर चर्चा करते हुए हम दृढ और कठोर हो सकते हैं। लेकिन अंत में हमें एक दूसरे की इज्जत का ख्याल रखना होगा और इस सीमा को समझना होगा। जब हम राजनीति की बातें कर रहे हों तो यह दिमाग में रखना जरूरी है कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए क्या विरासत छोड़ रहे हैं।’’

‘चुनाव के दौरान सेना की विश्वसनीयता पर सवाल उठना गलत’
पूर्व सैनिकों द्वारा राष्ट्रपति को लिखे कथित पत्र पर रक्षा मंत्री ने कहा, “यह उनका विशेषाधिकार है कि वह अपने सुप्रीम कमांडर से संपर्क करें, इस पर कोई विवाद ही नहीं। लेकिन परेशानी यह है कि चुनाव के दौरान हम सबको सचेत रहना होगा कि सेना की विश्वसनीयता पर सवाल न उठे। अगर किसी एक ने भी यह दावा किया कि उसने चिट्ठी के लिए नाम नहीं दिया तो यह उनकी मांग की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर देगी।”

राजनीति में सेना के नाम का इस्तेमाल किए जाने पर सीतारमण ने कहा कि हम सुरक्षाबलों का राजनीतिकरण नहीं करते, लेकिन अगर राजनीतिक इच्छा से कोई कार्रवाई की गई और अगर अब यह संभव हुआ है, तो क्या सरकार को कभी अपने फैसलों के बारे में नहीं बताना चाहिए? जाहिर है कि हमारी विश्वसनीय सेना निष्पक्षता से अपना काम करती है। मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं। लेकिन बिना राजनीतिक इच्छा के, बिना उन्हें कार्रवाई की स्वतंत्रता दिए क्या यह संभव होता?

‘बालाकोट हमले पर किसी देश ने हमसे सवाल नहीं किए’
बालाकोट हमले पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की प्रतिक्रिया पर रक्षा मंत्री ने कहा कि अब तक किसी भी देश ने सवाल नहीं खड़े किए और न ही यह कह कर समर्थन पीछे खींचा कि आपके दावे प्रमाणिक नहीं हैं? क्योंकि किसी भी सूरत में वो हम नहीं थे जिसने हमले का दावा किया था, बल्कि पाकिस्तानियों ने खुद ही बालाकोट हमले की बात दुनिया को बताई थी।

पर्रिकर-जेटली के रक्षा मंत्री रहते जो रफ्तार पकड़ी वो अभी जारी
सेना को मजबूत बनाने की सरकार की कोशिशों पर सीतारमण ने कहा कि मनोहर पर्रिकर और अरुण जेटली के समय में रक्षा क्षेत्र में हमने जो रफ्तार पकड़ी थी वह अभी भी जारी है। सशस्त्र बलों को आपात स्थिति में 300 करोड़ रुपए तक के हथियार खरीदने की ताकत देने पर उन्होंने कहा कि हमने पहले भी ऐसा किया है। हमने उन्हें इमरजेंसी में हथियार खरीदने की पूरी छूट दी है। रक्षा मंत्री ने कहा, “पुलवामा हमले के बाद भी हमने साफ कर दिया था कि अगर सेनाएं जल्द से जल्द हथियार खरीदना चाहें तो उन्हें पूरी आजादी है। यह एनडीए सरकार में मुमकिन है कि सशस्त्र बल जब और जितनी जल्दी हथियार खरीदना चाहें वो खरीद सकते हैं।”

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