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पहल /राजस्थान के 29 गांवों के लोग कोर्ट या थाने नहीं जाते, 5 साल से कोई केस दर्ज नहीं

  • भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चल रहे इन गांवों के लोग
  • 2014 से इन गांवों में मारपीट, लड़ाई-झगड़े या विवाद सामने नहीं आया
  • इनका कहना है कि इस पहल से वक्त और पैसा बर्बाद नहीं होता, भाईचारा भी बना बन रहता है

बूंदी (राजस्थान). बूंदी जिले के 29 गांव ऐसे हैं, जहां के लोग अहिंसा परमो धर्म: को आत्मसात किए हुए हैं। 2014 से इन गांवों में मारपीट, लड़ाई-झगड़े या विवाद सामने नहीं आया है। कोई कोर्ट-कचहरी तक नहीं गया। इन गांवों में लोग चौपाल पर बैठकर ही मतभेद निपटा लेते हैं। डाबी थाने के पांच, तालेड़ा का एक, गेंडोली के आठ, इंद्रगढ़ के दो, कापरेन का एक, देईखेड़ा के तीन, लाखेरी के तीन, नमाना का एक और करवर के पांच गांव हैं, जिनमें 5 साल से कोई पुलिस केस नहीं हुआ है।

अपराध मुक्त होने की यह है वजह

  1. इन गांवों में चौपाल पर बैठकर मसले सुलझाने की परंपरा आज भी कायम है। लोगों का मानना है कि अपने स्तर पर विवाद सुलझा लेने से कोर्ट-कचहरी में वक्त और पैसा बर्बाद नहीं होता, सबसे बड़ी बात भाईचारा बना रहता है।
  2. 400 की आबादी वाला गांव पूरी तरह तंबाकू मुक्त

    जजावर का माताजी का झौपड़ा गांव सदियों से भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चल रहा है। यहां के लोग सदियों से हुक्का, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, गुटखा खाना या बेचना तो दूर, छूना भी देवीय श्राप समझते हैं। गांव की आबादी करीब 400 है, कोई तंबाकू सेवन नहीं करता। मेहमान भी गांव में आए तो भी अपनी तरफ से हुक्के, बीड़ी-सिगरेट की मनुहार नहीं करते।

  3. गांववाले मानते हैं कि तंबाकू के किसी भी रूप में सेवन पर देवीय श्राप मिलता है। भोपा देवीलाल, माधोलाल, पूर्व सरपंच धन्नीबाई, किशनलाल बताते हैं कि किसी ने गलती से भी तंबाकू सेवन कर लिया या हाथ भी लगा लिया तो देवी उसे शारीरिक कष्ट देती है।
  4. आज मांस-शराब बेचने पर रोक

    भगवान महावीर स्वामी की जयंती पर बुधवार को पूरे जिले में शराब और मांस की दुकानें बंद रहेंगी। अगर कोई शराब या मांस बिक्री करते पाया गया तो उसे समझाया जाता है।

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